जवानी या बुढ़ापा होजमीं पर इस गुज़ारा होगगन की छाँव हो लेकिनयही मुझ को जलाना हो
जवानी या बुढ़ापा होजमीं पर इस गुज़ारा हो
गगन की छाँव हो लेकिनयही मुझ को जलाना हो