एक बुंद जिंदगी चखले उसको,
उड़ जाने के पहले जी भर जी ले उसको
सोच न ज्यादा समझ ले उसको
बह जाने के पहले गटक ले उसको
लेकर उड़ जाएगी उसके पहले
खुद ही मिला दे हवामे उसको
उड़ने दे ऊँचा गिरने से मत डर तू,
सुन ले दिल की बस वही कर तू.
जी मस्तमलंग सा कौन बताए कब,
इंसान गहरा तन्हा कुआँ बन जाए
एक गहरी लंम्बी सुरंग तू
सांसों की तू अब इतनी मत कर चिंता,
जिंदगी में होली एक भर दे रंग तू
दिल का खजाना खाली कर दे,
खुद ही अपनी ख़ुशी से झोली भर तू
©विनोद बाबाराव गणेशपुरे

