आस्था का अगर भाव होफिर सफल आप का दाव होधर्म हो कर्म के साथ मेंज़िंदगी इक हसी नाव होमानता हूँ नही दर्द कोमै जहाँ भी रहू चाव होइश्क़ में क्या भला क्या बुरादुश्मनी है जहाँ छाव हो©विनोद गणेशपुरे
आस्था का अगर भाव होफिर सफल आप का दाव हो
धर्म हो कर्म के साथ मेंज़िंदगी इक हसी नाव हो
मानता हूँ नही दर्द कोमै जहाँ भी रहू चाव हो
इश्क़ में क्या भला क्या बुरादुश्मनी है जहाँ छाव हो
©विनोद गणेशपुरे