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शाम होते ही


शाम होते हीअंधेरा छाते हीएक ख्याल आता हैएक अनचाहा सवाल आता है

इस शरीर की गर्मीमेरे मन की नर्मीअंग अंग की तड़पनमेरे दिल की तेज़ धड़कनक्या है ? क्यूँ है ?कैसे है ? कहाँ हैं ?

— कुलदीप
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