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नया आरम्भ


पौ अब फटने को हैंफिर सूर्योदय होने को हैंचन्द्रमा जो चलने को हैंएक ज्वाला अब जलने को हैं

एक नया दिन, एक नयी सुबहएक नया आरम्भ होने को हैं

— कुलदीप
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