चलो आज इश्क की, बात करते है।

वो आखरी मुकम्मल, रात करते है।।


तुम मारना मुझे पत्थर, जाने जाना।

हम फिर फूलों की बरसात करते हैं।।

सूर्यप्रताप सिंह