कुछ यादें बचा के रखा हैं हमने जमाने से,
तुम्हारी आरज़ू को रखा हैं दिल के सरहाने में,
तुम्हारी नशीली आंखों को हमने पिया हैं,
एक उम्र गुज़र जाएगी उसे उतारने में।
~सुमित कुमार


कुछ यादें बचा के रखा हैं हमने जमाने से,
तुम्हारी आरज़ू को रखा हैं दिल के सरहाने में,
तुम्हारी नशीली आंखों को हमने पिया हैं,
एक उम्र गुज़र जाएगी उसे उतारने में।
~सुमित कुमार