मिल न सके कभी सुख के उजालों से

जिंदगी घिरे रहे हम तेरे ही सवालों से

अजीब है न सपनों को सजाते रहना

रोज टूटते हुए तारों को मनाते रहना

जीने का कोई बहाना तो होना चाहिए

आँखों को बस अकेले में रोना चाहिए

वरना लोग हर आंसू का हिसाब पूछेंगे

शक़ की निग़ाहों से तुमको देखेंगे

बाँट कर भी मन का बोझ कम नहीं होगा

कोई सहारा बन जायेगा, हमदम नहीं होगा

- सुमन