बड़े अरमाँ से आशियाँ बनाकर

सोचा खुशियाँ रहेंगी इसमें

आई बस एक आँधी ग़म की

बिखड़ गए तिनके-तिनके


चाह प्रेम की दिल मे भरकर

मैंने एक तस्वीर सजाई

आई जब दुःख की बेला

अपनों ने भी आँख चुराई


नम आँखों की ओट में छुपकर

जब अपने ही दिल मे झाँका

'अपने' सभी पराये निकले

साथ बचा बस सन्नाटा - सुमन