दोस्त

सुख-दुख का साथी होता है दोस्त 

सुख से पहले दुख बाँटने आता है जो वो है दोस्त।

मुसीबत में बराबर का साथी होता है ये दोस्त 

बुराई पर टोकने आता है जो वो है दोस्त।

हौदा है जिसका बहुत ही ख़ास होता है वो दोस्त 

परेशानी में सबसे पहले याद आता है वो है दोस्त 

रोने के लिए ढूँढता है जिसका कंधा वो है दोस्त 

ख़ुशी बाँटने के लिए सबसे पहले ढूँढते है वो है दोस्त 

ज़्यादा नाराज़गी दिखाते है जिसपर वो है दोस्त 

सारे राज़ जिसे हो मालूम वो है दोस्त 

चेहरे की खामोशी जो पढ़ता है वो है दोस्त 

जिंदगी हो जाती है विरान जब ना हो ये दोस्त 

बेरंग ज़िंदगी को रंगीन बनाते है ये दोस्त 

ख़ालीपन को पूरा करते है जो वो है ये दोस्त 

भड़ास जिनपर निकाले तो चुपचाप सूने वो है दोस्त 

ग़ुस्से पर क़ाबू करते है वो होते है दोस्त 

साजिदा