कभी कभी तो
मंज़िल शायर होता हैं
कविता गीत होता हैं
जंगल पर्वत होता हैं
चाँद चकोर होता हैं
कभी कभी तो
शहर गांव होता हैं
सड़के धीरज होता हैं
सफ़र सुहाना होता हैं
आदमी हम तुम होते हैं
कभी कभी तो
गांव परदेशी होता हैं
मौसम दुल्हन होता हैं
नदियां सागर होता हैं
वो खिड़की पर आती हैं
कभी कभी तो
नेता कॉमरेड होता हैं
मीडिया रवीश होता हैं
रोटी गोल होता हैं
गरीब अमीर होता हैं
कभी कभी तो.!!


