नया जमाना
दौर कुछ पुराना सा बीत गया
लोगो का आना जाना छूट गया
अब कोई पड़ोसी दही,नमक मांगने नहीं जाता
अब कोई प्रेम से किसी को नहीं खिलाता
पुराना खेल अब किसी को ना भाता
तकनीकी दौर में खेल सारे छूट गए
बच्चे अब दौड़ना भूल गए
सदा जीवन उच्च विचार
नहीं होता अब बड़ों का सम्मान
लोहड़ी के वो मीठे गीत
अब नहीं सच्चा प्रेम और मीत
अब नए दौर ने है ये ठाना
अपना कमाना अपना खाना


