चुप मत रहो
खामोशी को तोड़ो अपनी, चुप मत रहो।
अन्याय को मत सहो, चुप मत रहो।
करो वीर पुकार तुम, शत्रु की बनो हार तुम।
रण चंडी बन करो प्रहार तुम।
तिरंगे का बनो सम्मान तुम।
चुप मत रहो.....
प्रकाश जोशी।


चुप मत रहो
खामोशी को तोड़ो अपनी, चुप मत रहो।
अन्याय को मत सहो, चुप मत रहो।
करो वीर पुकार तुम, शत्रु की बनो हार तुम।
रण चंडी बन करो प्रहार तुम।
तिरंगे का बनो सम्मान तुम।
चुप मत रहो.....
प्रकाश जोशी।