वर्तमान
आज सुबह अख़बार के पन्नों में पढ़ते हुए देखा के कही मुर्दों के पर्स चोरी हो गए। सोच रहा था जिंदा आदमी कहा चले गए जो मुर्दों के पर्स चोरी हो रहे है। कुछ दिन पहले हाथी और गाय के साथ हुई बर्बरता मन को बेचैन कर गई। शायद मेरा भगवान सो गया है। दुनिया में प्रेम की कमी हो गई। मौत सस्ती और जिंदगी महंगी हो गई। ये सरकारें अपनी अपनी रोटी सेक रही है। आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं। समय रहते जाग गए तो ठीक वरना विनाश निश्चित है मानवता का।
प्रकाश जोशी


