हज़ार ख्वाहिशें है मेरी और लापता यह मंज़र है,
पहुँचू कैसे उस मकाम तक मै बीच मे गहरा समंदर है।।
के लिख भी दू अगर मै खुद की तकदीर ज़रा सी,
पर क्या करे जो हाथो मै है मेरे
वह कलम नहीं शब्दों का खंज़र है।।
- पराग


हज़ार ख्वाहिशें है मेरी और लापता यह मंज़र है,
पहुँचू कैसे उस मकाम तक मै बीच मे गहरा समंदर है।।
के लिख भी दू अगर मै खुद की तकदीर ज़रा सी,
पर क्या करे जो हाथो मै है मेरे
वह कलम नहीं शब्दों का खंज़र है।।
- पराग