एक दिन जब कभी 

इन्टरनेट क्रेश होगा 

चारों ओर अफरा तफरी हो जाएगी 

आँकड़े खूब सारे आँकड़े 

कहीं दफन हो जाएंगे 

लोग बदहवास से

इधर उधर भटकेंगे

जीना दूभर हो जाएगा 

महिलाएं बच्चों से बार बार पूछेगी

बेटा वाॅट्सएप फेसबुक चला?

उस दिन बच्चे भूखे ही रह जाएंगे 

घरों में मातम सा छा जाएगा 

लेकिन 

खेतों में हर रोज की तरह

काम करते हुए स्त्री पुरूष 

किसान दिख जाएंगे 

घन से लोहा पिटता हुआ लोहार 

हमेशा की तरह 

पसीना बहा रहा होगा 

बांसुरी बजाता

आदिवासी चरवाहा 

गोधूलि में घर को लौट रहा होगा

गाँव के बच्चे गोटियाँ खेलते

चिल्लपौं करते हुए सुनाई दे जाएंगे 

पङोस में मजदूर की बीवी 

सिलबट्टे पर मसाला पिसते हुए मिल जाएगी

एक दिन दुनिया डेटा विहीन हो जाएगी 

और

सरकारी डेटा/ आँकड़ों के एहसान के बोझ से

किसान, मजदूर, महिलाएँ, बच्चे आदि सब

मुक्त हो जाएंगे 

जब एक दिन इंटरनेट क्रेश हो जाएगा....!!!



वन्दना दवे 

भोपाल