प्रीत प्रश्न
प्रबल प्रवाह सम्मोहन में
किस युग में बह रही हो
अनुगामी के अग्र अग्र हो
प्रतिगामियों को छोड़ सफ़र में
सहज सफल प्रतिक्षण
स्मृतिकुंड में
मैं झोंक तुम्हे देता हूं
न उत्तर होता है उस क्षण
न अपराध सिद्ध होता मेरा
फिर सहूं संताप क्यों
श्राप के पाप से जलूं क्यों
अगर न जानूं कि
किस अपराध को तुम भी सह रही हो
क्यों ही उस बोझ में रह रही हो


