सब स्थिर है
सब मौन है
कभी शब्द ही सब कुछ होते हैं
कभी मौन ही सब कुछ
यही तो थाह लेना है मन की
कि कभी शब्द समझ आते हैं
मौन नहीं
कभी मौन समझ आता है शब्द नहीं
और कभी कुछ समझ नहीं आता
न शब्द न मौन !


सब स्थिर है
सब मौन है
कभी शब्द ही सब कुछ होते हैं
कभी मौन ही सब कुछ
यही तो थाह लेना है मन की
कि कभी शब्द समझ आते हैं
मौन नहीं
कभी मौन समझ आता है शब्द नहीं
और कभी कुछ समझ नहीं आता
न शब्द न मौन !