"मौसम के घर का आलम बदला ही जा रहा है"
(कविता) दास्ताने मौसम's image
140K

"मौसम के घर का आलम बदला ही जा रहा है" (कविता) दास्ताने मौसम

मेरी लेखनी, मेरी कविता 
"मौसम के घर का आलम बदला ही जा रहा है"
(कविता) दास्ताने मौसम 

कुछ-कुछ घना है कोहरा, कुछ रात है अंधेरी, मौसम के घर हुई है,गंभीर हेरा फेरी।

 सूरज के सारथी ने रथ  
  अपना जोता होगा, शायद सुब
Read More! Earn More! Learn More!