तलबगार हूँ बेकार नही हूँ,

ईमानदार हूँ ख़बरदार नही हूँ।


हूँ तो यूँ कुछ भी नही लेकिन,

बेक़रार हूँ क़सूरवार नही हूँ।


बट चुका हूँ काई टुकड़ों में,

समाचार हूँ इश्तहार नही हूँ


अब भी उम्मीद है लौटने की,

वफ़ादार हूँ दावेदार नही हूँ।


उनकी आँखों में अब डूब कर,

गिरफ़्तार हूँ गुनहगार नही हूँ


जैसा दिल हो इस्तेमाल करें,

प्यार हूँ हथियार नही हूँ।


टूटे दिल को कैसे जोड़ा जाए,

संगसारहूँ शिल्पकार नही हूँ।


*संगसार - जिसे पत्थर मार-मार कर मार दिया जाए।


- अलट