क्या मै नागरिक हू !
भारत विवधताओ का देश है, ये बात किसी से अछूती नही और नाही ये की अनेकता में एकता ही हमरे देश को एक अनोखी पहचान से विश्व को परिचिय कराता है|
निःसंदेह हम सभी इस महान भारत के नागरीक है, परन्तु क्या महज इस भूमि में, रह कर उपार्जन करना और पेट भरना ही हमे नागरिक कहलाने का अधिकार देता है। या महज देशभक्ति के नरे लगाने से, हम नागरिक बन जाते है।
यह अभिवक्ती कि मै तो देश प्रेम से ओतप्रोत हूं, यह आपको नागरिक नहीं बनता, यह प्रेम ठीक उसी प्रेम की तरह जिसकी मंज़िल मिलन है, वो प्रेम नही अपितु वासना है।(वासना का तात्पर्य केवल शारीरिक भूक नही वरन लोभ, लालसा,स्वार्थपरायण इत्यादि है)।
निश्चय ही देशभक्ती हम सबकी प्यास है,परन्तु आज के युग में इसका इस्तमाल अनायास ही, कुछ व्यक्तियों द्वारा अराजकता फैलाने मै कार्यरत है। इस अबोध मै की, हम एक ऐसे तन्त्र से घिर चले है जिस तन्त्र का मूल आधार ही अराजकता है।
इस कथन का विषय आपको अराजकता से या देश प्रेम से अवगत कराना नहीं, अपितु नागरिक बनने की अभिव्यक्ति है।
क्या मै एक नागरिक हूं, यह सवाल ही आपका जवाब है। अगर आप आस्थिक है, तो निश्चय ही इस तथ्य से अवगत होंगे की परमेश्वर को जानने या पाने का घमंड ही, आपको उसी परमेश्व से दूर कर देता है। अनायस ही इस वाक्य का उलेख करने का मेरा अभिप्राय आपके द्वारा उस समझ से है, जिस समझ से आप खुद को नागरिक कहते है।
निश्चय ही आप इन विचार को नकार सकते है कि, नागरिक होने में, प्रेमी या इश्वरिय भक्ती की विचार का कोई समावेश नहीं है। परंतु अप इस विचार को कैसे नकारेंगे की जिससे आप प्रेम और आदर करते है, उसके प्रती आपकी अभिव्यक्ति उसे केवल चाहने से नहीं अपितु उसके हित में निष्ठा पूर्वक कार्य करने से है। आशा है कि आप अब इससे इत्तफाक ना रखेंगे की आपकी नागरिकता की विचारधारा आपके देशप्रेम सेही है और जब ये है तो क्या आप नागरिक है।
आप, मै और हम सभी को ये सवाल पूछने की आवश्कता है कि,क्या मै ने कभी अपने मोहले मै, सफाई की पहल की है? क्या मैंने अपने मोहले की समस्या को ठीक करने, या उस मोहले मै किसी असमाजिक कार्य के प्रति आवाज उठया है? क्या मैने शासन द्वारा प्रस्तुत योजना को समझ ने या उससे जुड़े सवाल शासन से करने का प्रयास किया है? अगर ना तो किस हक से हम खुद को इस महान देश का नागरिक कहते है, जबकि हम अपनी समाजिक कर्तव्यो से मुंह फेरे रहते है।
फिर किस हक से आप चाय पर चर्चा अपने मित्रो, रिश्तेदारों के संग इस शासन कि करते है,आरोप प्रत्यारोप के खेल में मग्न होके अपनी सारी दिन कि थकान देशहित के वक्ता बन के बिता जाते है।
निश्चय ही आप यह कहेंगे की इस देश के संविधान द्वारा दिए गए अधिकार से आपको हक है अपनी बात कहने का,अपने विचारो को व्यक्त करने का।


