तू क्या है?
किस माटी का गया है तुझे बनाया?
तू सख्त है? या है सरल?
ना है तू किसी की समझ में आया।
खुद टूट के मुझे तू बनाता गया,
मुझे आज़ादी दी,खुद जिम्मेदारियां निभाता गया,
उठाता गया बोझ अपने कंधों पर मेरा,
मुस्कुराता गया कि छुपा सके मुझसे दर्द तू तेरा।
ना जाने कैसे इतना तुझमे है बल,
न जाने कहा से इतना ठहराव तू है लाता,
मेरी हर परेशानी का सामना मेरे साथ है करता,
मेरी हर भूल को माफ़ तू करता है जाता।
खुद के लिए मुस्कुराना तू भूल गया है,
रोता भी तू मेरे गम में है,
शिकायतें तो मुझे ही तझसे रहती है,
तेरा हाल तो तू दबाये अपने ही मन में है।
मेरे पैरों तले की जमीन तू ,
मेरे सर का तू है आसमान,
मुश्किलें उठा रहा है तू,
ताकि हो सके जीवन मेरा आसान।
ना परवाह तुझे प्रशंसा की,
ना किसी श्रेय की आस रखता है,
लोभ तुझे बस मेरी सफलता का,
इतना निःस्वार्थ एक पिता ही हो सकता है।


