जब खतरे से ऊपर पारा होता है

तब बस्ती में भाईचारा होता है

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न हो जब प्यास तो दरिया हमारे नाम हो जाये

अगर हो भूख तो रोटी की गाड़ी जाम हो जाये

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जुगनू आपस की रौशनी के नुक्तचीं बने हैं

अंधेरी रात को सुबह का इंतज़ार रहता है

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अपने वज़ूद को दाव पर लगाना था

मना कर दिया नदी ने समुंदर होने से 

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बहुत दिनों से उदासी को नही देखा

चलो आज तबीयत से बिछडके देखें

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कई बिल्लियाँ मारी गयी

आदमी ने रस्ते काटे होंगे

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खुलने कोई नही आता

सब खेलने आते हैं दिल से

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