कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

लूट लिया माली ने उपवन,

लुटी न लेकिन गंध फूल की,

तूफ़ानों तक ने छेड़ा पर,

खिड़की बन्द न हुई धूल की,

नफ़रत गले लगाने वालों! सब पर धूल उड़ाने वालों!

कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पन नहीं मरा करता है


- गोपालदास 'नीरज'