मुझको गहरा सदमा देकर,घूम रही हो जानेजां
दोस्त कहूँ या दुश्मन तुमको,ये तो बता दो दिल मेहमां
पहले रूप से मोहित करके,फिर आंखों से वार किया
बचे कुचे थे जो भी हम,केश खोल के मार दिया
चाल तुम्हारी मटकन वाली,तीखे नैन कटारे हैं
देख तुम्हें पिछले मंगल से,सबकुछ तुम पर हारे हैं
रंभा,कुंडा,मेनका,उर्वशी,सब नाम तुम्हारे ही होंगे
इंद्र स्वयं तुमको न पाकर,खोज में ही निकले होंगे
इतना सुंदर रूप स्वयं,सुंदरता का स्रोत तुम्ही हो
निस्संदेह तुम्हें पाने को,देव-दनुज का वास यहीं हो
बात हमारी मानो तो,घर जाकर नज़र हटवा लेना
मम्मी से अपनी कहकर के,काला टीका लगवा लेना
'अश्वनी सोनी'


