जुर्रत की है जो मैंने तेरे गुरुर से टकराने की, उम्मीद तुझसे थी मुझे इसी नजराने की I नियत में तेरे खोट थी ये तो हम जानते थे पर इतना गिर जायेगा, लोग कहते थे, पर हम नहीं मानते थे, आ के देख जरा मेरे जल्शे में ये वही लोग है, जिन्होंने ताबीर लिखी थी तेरे हुकूमत के अफसाने की. जुर्रत की है जो मैंने तेरे गुरुर से टकराने की, उम्मीद तुझसे थी मुझे इसी नजराने की....... सच बोलना गर गुनाह है तेरी हुकूमत में, तो हाँ मैंने बगावत की है ,लिख दे मेरा नाम "बागी" पर मत भूल दौर-ए-जम्हूरियत है ये, और यहाँ तारीखें बदलेंगी, हुकूमते बदलेंगी, और आवाम जवाब मांगेंगी तुझसे तेरे बढे खजाने की. जुर्रत की है जो मैंने तेरे गुरुर से टकराने की, उम्मीद तुझसे थी मुझे इसी नजराने की.......