अबकी छुट्टी जब घर आयेंगे
नन्ही बिटिया को देखेंगे पहली बार
उसको पहली बार छुयेंगे
पहली बार गोद में उठायेंगे
मुन्ना को अबकी बार
नई साईकिल दिलायेंगे
अबकी छुट्टी जब घर आयेंगे
कुछ तेरे दुख दर्द सुनेंगे
कुछ किस्से अपने भी सुनायेंगे
बैठ तेरे संग खेत की मेड़ों पर
गन्ना चूसेंगे मटर की घुघरी खायेंगे
अम्मा ने ख़त में लिखा है
उनको धुंधला धुंधला सा दिखता है
अबकी छुट्टी जब घर आयेंगे
अम्मा की आंख डाक्टर को दिखायेंगे
बाबूजी ने जो लिया है कर्ज
अबकी बार चुकायेंगें
गुड़िया के ब्याह की खातिर
कोई लड़का देखेंगे
अबकी छुट्टी जब घर आयेंगे
जिन रातों को हम तुम साथ न थे
उन रातों की सब कसर चुकायेंगें
रात को बैठ छत पर हम दोनों
लेकर हाथों में एक दूजे का हाथ
कुछ पल चांद निहारेंगें
कुछ ख्वाब बुनेंगे कोई गीत गायेंगे
तुझे शिकायत रहती हैं हरदम
इतने साल हुए हमारी शादी को
कहीं कभी घूमनें भी नहीं गये हम
अबकी छुट्टी जब घर आयेंगे
तुझे कहीं घुमाने लेकर जायेंगे

