कुरु की धरती पर रक्त बहा 

या अश्रु मोहक लोचन का ?

कुरु वंश का रक्त जला या 

नेत्र खुला त्रिलोचन का?

शिशिर जो 

काट रहे थे प्रेम परस्पर 

मनुज जाति के नाश को तत्पर 

लालच की प्यास बुझाने को 

या हठ पर अडिग हो जाने को 

सब खेल हुआ, सब माया थी 

नाटक धर्म समझाने को